आम्बुआ का बस स्टैंड अतिशीघ्र जोबट तिराहे पर जाने की कवायद?

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मयंक विश्वकर्मा, आम्बुआ

वर्षों पूर्व नागरिकों की उदासीनता एवं व्यावसायियों की अतिक्रमण की हठधर्मिता के चलते कस्बे के मध्य में स्थित बस स्टेंड मुर्गी बाजार क्षेत्र में चला गया साथ ही कुछ बसें कस्बे से बाहर लगभग २कि मी दूर गांधी आश्रम चौराहे से होकर गुजरने लगी जो कि आज वहीं से जा रही हैं,एक बार वही इतिहास दोहराया जाने की कवायद शुरू हो गई है तो क्या अब यहां से भी बस स्टैंड कहीं और स्थानांतरित होने जा रहा है?

आम्बुआ कस्बे की यह विडंबना रही है कि जनहित के मुद्दे हमेशा गौंड रहते आए हैं निजी स्वार्थ निजी हित सर्वोपरि रहे हैं जिनका खामियाजा आम नागरिकों को उठाना पड़ा है और आज भी उठा रहे हैं, उन्हीं में एक मुद्दा कस्बे से बस स्टेंड का बाजार से बाहर जाना और अब वहां से भी और बाहर जोबट तिराहे पर जाने की कवायद तथा उसके बाद शायद गांधी आश्रम चौराहे पर भी चला जाए तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए? 

पूर्व में जब बाजार के बस स्टेंड से बसें मुर्गी बाजार क्षेत्र में चालक परिचालक ने अपनी मर्जी से कर लिया था तब और अब भी कस्बे के कुछ पत्रकारों तथा समाज सेवियों ने प्रयास किया था जिसका सुखद परिणाम देखने को मिला था , लेकिन कतिपय विध्न संतोषियों को जनता को मिलने वाली सुविधाएं अच्छी नहीं लगी और फिर वही स्थिति बना दी ,एक बार पुनः कुछ समाजसेवियों तथा बस चालक परिचालकों की प्रताड़ना से परेशान रहने वालों ने समाचारों एवं जनसुनवाई तथा यातायात विभाग (आर टी ओ ) को परेशानी से अवगत कराया मगर हमेशा की तरह वही ढांक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ हो रही है ।

जो सूचनाएं विश्वस्त सूत्रों से मिल रहीं हैं उसके अनुसार अनुबंधित बसों को बस स्टेंड पर फैले अतिक्रमण के कारण पलटने में परेशानी होती है लिहाजा अतिक्रमण हटाया जाए मगर हटाएगा कौन? क्या शिकायत कर्ता हटाएंगे या नागरिक हटाएंगे? प्रशासन क्या कर रहा है? एक प्रशन यह भी उठना स्वाभाविक है कि जब अन्य बसें यहां से पलट रही हैं तो अनुबंधित बसों को बस स्टेंड पर पलटने में क्यों परेशानी होती है,दूसरा प्रश्नन यह भी खड़ा होता है कि सवारियां लेने आते समय ये बसें कैसे पलट जाती है तथा जब वापसी के समय सवारियों को उतारना होता है तब बसें बस स्टेंड पर क्यों नहीं पलट पाती हैं?जिसका उत्तर न तो चालक परिचालक,न ही बस मालिक, और न ही आर टी ओ ही देना चाहते हैं,।

सूत्रों से पता चला है कि बस आपरेटर संगठन द्वारा आम्बुआ बस स्टेंड पर फैले अतिक्रमण के कारण बसें कस्बे में नहीं आने का कारण बताया जा कर पल्ला झाड़ा जा रहा है, यदि संगठन ने शिकायत पत्र दिया है तो प्रशासन चुप क्यों है? और जनहितैषी इस मुद्दे को हल क्यों नहीं किया जा रहा है? यदि यह समस्या हल नहीं होती है तो क्या भविष्य में बस स्टेंड जोबट तिराहे या गांधी आश्रम चौराहे पर हो जायेगा? और यदि ऐसा होता है तो यह भी नागरिकों की उदासीनता का ही नतीजा कहा जायेगा जोकि स्वयं भी अपने अधिकारों के लिए लड़ना नहीं चाहते हैं, और इसी तरह वर्षा, सर्दी, गर्मी में स्वयं तथा बच्चों बूढ़ों, बीमारों परेशान होते देखते रहेंगे। हालांकि जो इस ओर प्रयासरत हैं वे अभी हार मानने को तैयार नहीं हैं।

बस एसोसिएशन द्वारा आम्बुआ बस स्टेंड पर फैले हुए अतिक्रमण के कारण बसें बस स्टेंड पर लाने में परेशानी बाबद एक आवेदन जिलाधीश, आरटीओ, पुलिस थाना एवं आम्बुआ पंचायत को दे कर स्थित से अवगत कराया गया है , तथा बस स्टेंड पर फैले अतिक्रमण के कारण बसें नहीं लाने की बात कही है।

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