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झाबुआ-चालीस दिनों की त्याग तपस्या के बाद प्रभु यीशू ख्रीस्त के पुनरूत्थान के लिए जो की पास्का कहलाता हैं उस रात्री जागरण काल में बिशप डॉ बसील भूरिया एसवीडी के साथ पुरोहितों, धर्मबहनों और लोक धर्मियों ने कैथोलिक चर्च झाबुआ में भाग लिया। बिशप भूरिया ने धर्म विधि की शुरूआत करते हुए नई आग को आशीष दी। पास्का मोमबत्ती पर अल्फा, ओमेगा अंकित करते हुए। प्रार्थना पढी जिसका अर्थ है आदि और अंत को अंकित किया। फादर इम्बानाथन की अगुवाई में में ख्रीस्त की ज्योति के उदघोष के साथ जुलूस वेदी तक ले जाया गया जहां से उन्होंने ज्योति गुणगान कर लोगों को उस रात की याद दिलाई जिसमें प्रभु के विश्वासियों ने लालसागर पार करते हुए ईश्वर की महती दया का अनुभव किया। डायोसिस पीआरओ रॉकी शाह ने बताया कि पवित्र बाइबिल के पुराने व्यवस्थान में से 7 पाठों को पढ़ा गया। प्रत्येक पाठ के बाद बिशप बसील भूरिया ने प्रार्थना की। सातवे पाठ के बाद महिमा पुर्नजीवित प्रभु यीशू ख्रीस्त की प्रतिमा का अनावरण किया गया। उसके साथ ही महिमा गान से सारा प्रांगण गूंज उठा। चर्च की सभी घंटियां बज उठी। ये घंटियां प्रभु की मृत्यू के दुख से शांत थी जो आज उसी यीशू के पुनरूत्थान के साथ खुशियां मना रही थी। महिमा गान के बाद आठवें पाठ और सुसमाचार जो की नए व्यवस्थान से लिए गए थे उनका वाचन किया गया। तब बिशप भूरिया ने उनके प्रवचन में कहा कि हम सभी सौभाग्यशाली है कि आज की इस रात यहां पर एकत्रित होकर प्रभु के पुनरूत्थान के सहभागी हुए है। धर्म विधी के अगले भाग में प्रवेश करते हुए संतों की विशेष स्तुति विनती गाई गई। यह संतों की स्तुति विनती कलीसियां कुछ ही विशेष धर्म विधियों में गाई जाती हैं। पास्का रात्रि को और धर्माध्यक्ष अभिषेक एवं पुरोहिताई अभिषेक जैसे उपलक्ष्य पर।