मयंक विश्वकर्मा, आम्बुआ

थाना आम्बुआ क्षेत्र के ग्राम बंद घुसबयड़ा में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ अपने घर रुकने की बात को लेकर एक मामा ने अपने ही भांजा-जमाई की धारदार फालिये से वार कर निर्मम हत्या कर दी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की और आरोपी को महज 18 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया।

यह है पूरा मामला

दिनांक 11.07.2026 को मृतक की पत्नी (फरियादिया) ने आम्बुआ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि वह अपने पति गुड्डू के साथ ग्राम बंद घुसबयड़ा में अपने मामा के घर मेहमान आई थी। गाँव पहुँचने पर वे सबसे पहले मामा किसन के घर रुके, जहाँ किसन ने उन्हें सोडा पिलाया।

इसके बाद जब दंपत्ति ने अपने दूसरे मामा रघु के घर जाने की बात कही, तो किसन ने उन्हें अपने ही घर रुकने और मेहमानी लेने की जिद की। लेकिन फरियादिया और उसके पति ने यह कहते हुए मना कर दिया कि उन्होंने मामा रघु को खाना बनाने के लिए बोल दिया है और वे वहीं खाना खाएंगे। इसके बाद दोनों मामा रघु के घर चले गए।

सोते समय किया जानलेवा हमला

शाम को मामा रघु के घर खाना खाने के बाद गुड्डू और उसकी पत्नी घर के आंगन में खाट लगाकर सो रहे थे। रात करीब 12:30 बजे आरोपी मामा किसन (पिता नाहला, निवासी बंद) हाथ में लोहे का धारदार फालिया लेकर वहाँ पहुँचा। उसने चिल्लाकर कहा, “जमाई गुड्डू, तू मेरे घर क्यों नहीं रुका?” और जान से मारने की नीयत से खाट पर सोए गुड्डू पर फालिये से ताबड़तोड़ वार कर दिए। गंभीर चोटें आने के कारण गुड्डू की मौके पर ही मौत हो गई।

फरियादिया की रिपोर्ट पर थाना आम्बुआ में अपराध क्रमांक 218/2026, धारा 103(1) बी.एन.एस. (भारतीय न्याय संहिता) के तहत मामला दर्ज कर विवेचना में लिया गया।

घटना की सूचना मिलते ही आम्बुआ पुलिस टीम ने तत्काल मौके पर पहुँचकर मौका मुआयना किया और शव का पोस्टमार्टम (PM) करवाया। इसके बाद पुलिस अधीक्षक अलीराजपुर के मार्गदर्शन एवं एसडीओपी जोबट के निर्देशन में आरोपी की तलाश के लिए एक विशेष टीम रवाना की गई। पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए महज 18 घंटे के भीतर आरोपी किसन पिता नाहला भील को गिरफ्तार कर लिया, जिसे माननीय न्यायालय अलीराजपुर में पेश किया गया है।

इस टीम की रही सराहनीय भूमिका

इस अंधे कत्ल का पर्दाफाश करने और आरोपी को तत्काल सलाखों के पीछे पहुँचाने में थाना प्रभारी आम्बुआ उपनिरीक्षक (उनि) मोहनसिंह डावर, सउनि बाबूलाल गेहलोत, सउनि विजय वर्मा, प्रधान आरक्षक (371) भूरीसिंह, प्रधान आरक्षक (366) अमरसिंह, प्रधान आरक्षक (223) मनोज, आरक्षक (351) सुनील, आरक्षक (484) जेराम, आरक्षक (540) भारत, आरक्षक (131) राकेश, आरक्षक (315) दिनेश, आरक्षक (525) राजू और महिला आरक्षक (520) मनीषा की सराहनीय भूमिका रही।

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