आदिवासी ही वैदिक उपासक हैं क्योंकि वह पर्यावरण की रक्षा करते हैं एवं प्रकृति पूजक है :  स्वामी प्रभुदानंदजी

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भूपेंद्र नायक, पिटोल

चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर  चिन्मय मिशन द्वारा  “अमृत वर्ष” मनाने का संकल्प लिया गया है। इस यात्रा में स्वामी चिन्मयानंद जी की  चरण पादुका और स्वामी चिन्मयानंद जी की मूर्ति को लेकर यह अमृत यात्रा 31 दिसंबर को चिन्मयानंद विभूति आश्रम पुणे से प्रारंभ होकर संपूर्ण भारत देश में 3500 किलोमीटर तक की 300 दिनों तक आध्यात्मिकता के साथ सनातन हिंदू संस्कृति को संरक्षित करने के लिए पर ऐतिहासिक कार्य जिसमें सभी समाज वर्ग धर्म के लोगों के 8 लाख लोग युवाओं को जोड़ना है आज यह यात्रा गुजरात राज्य में प्रवेश से पहले  पिटोल में  इस यात्रा का भव्य स्वागत किया गया  जिसमें पारंपरिक आदिवासी ढोल मांदल के साथ आदिवासी नृत्य करते हुए कलाकारों ने अहमदाबाद बैतूल राष्ट्रीय मार्ग से प्रवेश रोड छोटी पिटोल से प्रेमशीष स्कूल तक आदिवासी संस्कृति के नृत्य के साथ यात्रा को लाया गया  इस यात्रा में चिन्मयानंद मिशन के संतो के साथ आम जन मानस का  जुड़ाव रहा इस यात्रा में का पहला पड़ाव मध्य प्रदेश  के पिटोल में प्रेमाशीष स्कूल पर हुआ जहां संतो द्वारा बच्चों को संस्कारित जीवन जीने के उपदेश दिए ।

चार लोगों का आशीर्वाद होगा तो आप हमेशा सफल होंगे

चिन्मयानंद मिशन यात्रा में मध्य प्रदेश के प्रभारी संत श्री प्रभुदानंद जी बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि सर्वप्रथम मातृदेव भव पित्र देव पितृ देव भव आचार्य देव भव के साथ संतो की कृपा होती है तो कितनी भी कठिन परिस्थितियों में आप पढ़ाई करो हमेशा सफलता मिलेगी अपने पढ़ने वाले गुरुजनों का हमेशा आदर सत्कार करना चाहिए तथा उनकी प्रेरणा और उनके मार्गदर्शन में सफलता प्राप्त करने की सीढ़ियां मिलती है। चिन्मय मिशन के स्वामी प्रभुदानंद जी ने बताया कि स्वामी चिन्मयानन्द जी द्वारा स्थापित चिन्मय मिशन वेदान्त और श्रीमद्भगवद्गीता वेदान्त रामचरितमानस उपनिषद के बारे में जनमानस को विशेष रूप से समझता है जिससे सही दिशा के साथ राष्ट्र निर्माण की ओर जागृति लाई जा सके। चिन्मयानंद मिशन 75 वर्षों से शाश्वत शिक्षाओं के माध्यम से विश्वभर में लोगों को प्रेरित करता आ रहा है। उन्होंने कहा कि अमृत वर्ष समारोह मिशन के मूल आदर्शों और आध्यात्मिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

शहर के लोगों को आदिवासियों से प्रेरणा लेकर कार्य करना होगा

आदिवासी ही वैदिक उपासक हैं क्योंकि वह प्रकृति की रक्षा करते हैं उनके ऊपर अभी पाश्चात्य संस्कृति का असर इतना नहीं हो रहा है आधुनिकता के का मतलब पद प्रतिष्ठा और पैसा कमाना नहीं है धन और भोग की प्रधानता ने हमारे जीवन को बदल दिया है जनजाति समाज से पश्चात संस्कृति का प्रभाव रोकना ही सनातन धर्म की रक्षा करना तथा समरसता के भाव से जाति पाति भेदभाव को दूर करनाइस यात्रा 25 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में समापन होगा।

चिन्मयानंद मिशन की अमृत यात्रा में सामूहिक प्रतिध्वनि

संगीतमय प्रस्तुतियों से लेकर डिजिटल यज्ञों तक, भाषा सहयोग कार्यक्रमों से लेकर युवा नेतृत्व वाले आंदोलनों तक, ये सभी पहलें चिन्मय आंदोलन की निरंतर विस्तारित भावना को दर्शाती हैं। प्रेम और ज्ञान पर आधारित प्रत्येक कार्य परिवर्तन की एक चिंगारी बन जाता है जो दिलों को छूता है और जीवन को प्रेरित करता है। इस कार्यक्रम के पश्चात  इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट पिटोल बॉर्डर से पर यात्रा में साथ चल रहे संतो के साथ सभी युवा साथियों को स्वल्पाहार ओर भोजन करा कर पिटोल से यात्रा की बिदाई दे कर गुजरात राज्य में प्रवेश कर गई।

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