शान ठाकुर, पेटलावद
हिंदू सम्मेलन समिति के तत्वावधान में नगर पेटलावद में शुक्रवार को दो स्थानों पर आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन ने संपूर्ण नगर को धर्म, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग दिया। नगर की केशव व तेजाजी बस्ती और माधव बस्ती के आयोजन स्थल पर हजारों की संख्या में हिंदू समाज के पुरुष, महिलाएं, माताएं-बहनें एवं युवाओं ने सहभागिता कर धर्मसभा एवं भारत माता की आरती का लाभ लिया। एक ही दिन दो स्थानों पर हुए आयोजनों से नगर के गली-मोहल्लों में भजन, कीर्तन और कलश यात्राओं का दौर चलता रहा, जिससे पेटलावद पूरी तरह धर्ममय वातावरण में परिवर्तित हो गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के द्वारा भारत माता की पूजन और पुष्प अर्पण कर दीप प्रज्वलीत कर किया गया। और अतिथियों को साल श्री फल भेंट कर सम्मानित किया गया।
केशव व तेजाजी बस्ती मे अतिथि के रूप मे संत श्री रघुवीर दास जीमहाराज, मातृशक्ति श्रीमती संगीता दीदी राठौर, मुख्य वक्ता श्री बलवंत जी हाडा उपस्थित रहे। वही माधव बस्ती मे मुख्य वक्ता श्री तेजराम जी मांगरोदा, संत श्री रामेश्वर गिरी जी महाराज ओर मातृशक्ति सुश्री वैष्णवी भट्ट उपस्थित रहे।

गौ अभ्यारण्य बने, गौ हत्यारों को मिले कठोर दंड मिले- संत रघुवीरदासजी
केशव व तेजाजी बस्ती के सम्मेलन के मुख्य वक्ता राजस्थान के तलवाड़ा से पधारे सुप्रसिद्ध गौ भक्त संत श्री रघुवीरदास जी महाराज ने ओजस्वी उद्बोधन देते हुए झाबुआ जिले में हाल ही में हुई गौ हत्या की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने मेघनगर के समीप हुई घटना को मानवता पर कलंक बताते हुए कहा कि अब गौ माता की हत्या किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
महाराज श्री ने शासन-प्रशासन से मांग की कि गौ हत्या के दोषियों को फांसी जैसी कठोर सजा दी जाए तथा झाबुआ जिले में प्रदेश का पहला विशाल गौ अभ्यारण्य स्थापित किया जाए, जिससे सड़कों पर भटकने वाली एवं तस्करों के निशाने पर रहने वाली गायों को सुरक्षित आश्रय मिल सके। उन्होंने कहा कि “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना तभी साकार होगी, जब गौ माता सुरक्षित होंगी।

कुटुंब प्रबोधन व पंच परिवर्तन समाज की नींव – संगीता दीदी
लॉ कॉलेज की प्रोफेसर संगीता दीदी राठौर ने कुटुंब प्रबोधन और पंच परिवर्तन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि परिवार समाज की पहली इकाई है। यदि परिवार संस्कारित होगा तो समाज स्वतः सुदृढ़ बनेगा। उन्होंने पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव से बचते हुए बच्चों को सनातन मूल्यों से जोड़ने, संवाद बढ़ाने, स्वदेशी अपनाने और सामाजिक समरसता पर बल दिया।
