चंद्रशेखर आज़ाद नगर में बिना डिग्री के डॉक्टरों का खुला खेल, प्रशासन की भूमिका पर सवाल

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भूपेंद्र चौहान, चंद्रशेखर आजाद नगर

चंद्रशेखर आज़ाद नगर में बिना मान्यता प्राप्त डिग्री के तथाकथित डॉक्टरों द्वारा एलोपैथिक इलाज का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। नगर में 8 से 10 ऐसे क्लीनिक संचालित हो रहे हैं, जहाँ पशु उपचार करने वाले या केवल आयुर्वेदिक लाइसेंसधारी व्यक्ति आम नागरिकों का इलाज कर रहे हैं।

इन क्लीनिकों पर पहले भी कई बार कार्रवाई हो चुकी है। एसडीएम, तहसीलदार, सीएचओ सहित वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अस्पताल सील किए गए, प्रकरण भी दर्ज हुए, लेकिन कुछ समय बाद ये क्लीनिक फिर से धड़ल्ले से शुरू हो गए जबकि उनके ऊपर पूर्व में कई धाराओ में प्रकरण दर्ज है।

यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में अब तक जितनी भी बड़ी कार्रवाइयाँ हुई हैं, चाहे वह अवैध अनाज की गाड़ियाँ हों या शराब की गाड़ियाँ, लगभग हर मामले में सामाजिक संगठनों ने खुद आगे बढ़कर गलत काम पकड़कर प्रशासन को सौंपा, उसके बाद जाकर प्रशासन ने कार्रवाई की।

अब सवाल यह है कि क्या अवैध क्लीनिक जैसे गंभीर मामले में भी आम जनता और सामाजिक संगठनों को ही आगे आना पड़ेगा? या फिर प्रशासन इस बार स्वयं पहल करते हुए बिना किसी दबाव के कार्रवाई करेगा?

स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है जब इन क्लीनिकों से निकलने वाला मेडिकल कचरा नियमों के विरुद्ध कचरा वाहनों में डाल दिया जाता है, जिसे पशु और आवारा जानवर खा रहे हैं। इससे टीबी, हैजा जैसी संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा पूरे क्षेत्र में बना हुआ है।

नगर पंचायत को किसी भी व्यवसाय की जानकारी देना अनिवार्य है, इसके बावजूद नगर पंचायत, सी,एम, ओ, थाना प्रभारी, एसडीएम व तहसीलदार स्तर पर चुप्पी बनी हुई है। यह चुप्पी लापरवाही है या किसी प्रकार का संरक्षण—यह अब जनचर्चा का विषय बन चुका है।

क्या कहते है अधिकारी

एसडीएम निधि मिश्रा से चर्चा की तो उन्होंने कहा कि 2026 में कई अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाएंगे। आगे भी सम्बंधित विभागों के अधिकार्यों से चर्चा कर कार्रवाई कर अवैध गतिविधि को रोकने का पूर्ण प्रयास करेंगे।

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