मयंक विश्वकर्मा, आम्बुआ बसंत पंचमी के साथ ही होली की आहट सुनाई देने लगती है तथा माघ पूर्णिमा के दिन शुभ मुहूर्त में होली का डांडा गाड़ दिया जाने के बाद ग्रामीण एक माह तक कोई शुभ कार्य नहीं करते हैं। आलीराजपुर जिले में आदिवासी संस्कृति का लोक पर्व भगौरिया होलिका दहन के पूर्व एक सप्ताह तक मनाया जाता है यह त्यौहार होली के आगमन का पूर्व संदेश देता है इसी के साथ-साथ होली का डांडा भी जब गड़ जाता है तो ग्रामीण परंपरा के अनुसार विवाह आदि शुभ कार्य भी एक माह के लिए बंद हो जाते हैं जो कि होलिका दहन के पश्चात प्रारंभ होते हैं होली का डांडा ग्रामीण क्षेत्रों के पुजारा द्वारा विधि विधान के साथ प्रतिवर्ष गाड़ा जाता है इस बार भी पुजारा ने डांटा गाड़ दिया अब भगौरिया तथा होली की मस्ती का इंतजार क्षेत्रवासी बेसब्री से कर रहे हैं। Post navigation बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था और बढ़ते अतिक्रमण को लेकर युवक कांग्रेस ने सौंपा ज्ञापन विद्यालय में पेरेंट्स के साथ बच्चों की अनूठी प्रतियोगिता