झाबुआ लाइव के लिए थान्दला से रितेश गुप्ता की रिपोर्ट – साधु संत सदाचारी हैं क्योंकि वे अनाचारो को टालते हैए सादगीपूर्ण रहते है। आडम्बर मुक्त जीवन जीते है और कष्टों को सहते है। जैन आगमों में गृहस्थों को श्रमणोपासक कहा गया है क्योंकि गृहस्थ श्रमणों (साधुओं) की उपासना करनें वाले एवं उनके पद चिन्हों पर चलने वाले है। पख्खी पर्व के अन्तर्गत आयोजित पौषध भवन पर व्याख्यानमाला में पूज्य श्री धर्मदास जैन स्वाध्यायी संघ के स्वाध्यायी भरत भंसाली ने जैन आगम में दषवैकालिक सूत्र में वीर्णत 52 अनाचारों की व्याख्या करते हुए कहा कि साधुओं के आचार को जानकर गृहस्थ उनके संयम मे सहयोगी बने व इन अनाचारो से संदेश प्राप्त कर अपने जीवन को भी मर्यादित व सादगीपूर्ण बनाये। वर्तमान समय में विवाह आदि प्रसंगो पर अपव्यय व फुहड़ता पर प्रहार करते हुए भंसाली ने कहा कि यह कृत्य कर्म बन्ध के हेतु है एवं गृहस्थों को दुराचारी बनाने वाले है। इस अवसर पर स्वाध्यायी राजेंद्र रूनवाल ने संसार को गरम मसाले की उपमा देते हुए कहा कि गरम मसाला उपर से आकर्षक व ठंडा दिखाई देता है किन्तु वह स्वास्थ के लिए हानिकारक है। आचार्य गुरूदेव उमेशमुनिजी मसा की प्रेरणा से प्रत्येक पख्खी पर्व पर सामूहिक तप आराधना एवं स्वाध्याय आदि की गतिविधियां चल रही है इसी के अन्तर्गत कल 40 श्रावकों एवं 25 श्राविकाओं ने उपवास तप की आराधना का लाभ लिया। पख्खी श्रावक मंडल के सभी श्रावको के पारणे का लाभ नानालालजी मंगलेष कुमारजी श्रीमार परिवार ने लिया।
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